कराग्रे वसते लक्ष्मिः करमध्ये सरस्वति । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥ Karaagre Vasate Lakshmi

 


भारतीय शास्त्रों और ग्रंथों में प्रातःकाल उठने और उसके बाद क्या क्या करना चाहिए ये विस्तार से बताया गया और इन्हे संस्कारों भी कहते है 

हमें प्रातःकाल उठना चाहिए और उसके बाद हमें अपने आँखों को खोलना चाहिए , और आंखे खुलते ही हमें शुभ चीजों को देखना चाहिए 


इसके लिए हमारे शास्त्रों में कर दर्शन का विधान है अर्थात अपनी हथेली को देखना 

उठने के बाद बैठ के अपने दोनों हथेली (हाँथ) को एक साथ सटा के अपने आँखों को खोलना चाहिए और अपने हथेली को देखना चाहिए और निचे लिखे मंत्र को बोलना चाहिए 


कराग्रे वसते लक्ष्मिः करमध्ये सरस्वति ।

करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥


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उपरोक्त श्लोक में कहा गया है की कर के आगे वाले भाग में माता लक्ष्मी जी निवास करती है l 

कर के मध्य भाग में ज्ञान और विद्या की देवी माता सरस्वती का निवास है l 

और कर के मूल / जड़ में इस संसार के पालनहार चराचर के स्वामी भगवान 

श्री हरी विष्णु जी रहते है  अतः प्रभातकाल मैं इनका दर्शन करता हूँ 


इसका व्यवाहरिक तात्पर्य यह है की हमें अपने कर्मो पे विश्वाश करना चाहिए 

और परिश्रम के साथ बुद्धि का उपयोग कर के अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहिए। 


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