Class 10th Slok Sanskrit and Hindi meaning
सुभाषितानि कक्षा 10 की संस्कृत पाठ्यपुस्तक (शेमुषी भाग-2) के 'सुभाषितानि' पाठ में जीवन के नैतिक मूल्यों, परिश्रम के महत्त्व, और अच्छे स्वभाव पर आधारित सुंदर श्लोक दिए गए हैं। इनमें आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु और परिश्रम को सच्चा मित्र बताया गया है, साथ ही यह समझाया गया है कि गुणी व्यक्ति ही गुण को समझता है और समान स्वभाव वाले लोगों में ही मित्रता होती है। 1. उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ हिन्दी अर्थ: कार्य केवल मेहनत (उद्यम) करने से पूरे होते हैं, न कि केवल मन में इच्छा करने से नहीं। जैसे सोए हुए शेर के मुंह में हिरण स्वयं प्रवेश नहीं करता, बल्कि शेर को शिकार के लिए स्वयं परिश्रम करना पड़ता है। 2. प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥ हिन्दी अर्थ: प्रिय (मीठा) बोलने से संसार के सभी जीव संतुष्ट होते हैं। इसलिए हमेशा प्रिय वचन ही बोलने चाहिए; ऐसे अच्छे वचन बोलने में कंजूसी कैसी ? 3. विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्...